"लड़की मांगलिक है" - यह एक वाक्य कई अच्छे रिश्तों को रोक देता है। आइए समझें कि यह वास्तव में क्या है।
मांगलिक कब
कुंडली में मंगल लग्न से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो तो व्यक्ति मांगलिक माना जाता है। उत्तर भारत में इसे चंद्र और कई बार शुक्र से भी देखा जाता है। दक्षिण भारत में इसे "कुज दोष" कहते हैं और कई परंपराएँ 2रा भाव भी जोड़ती हैं।
लग्न से मांगलिक के लिए सही जन्म समय चाहिए - लग्न हर दो घंटे में बदलता है।
कब दोष मिल जाता है
- दोनों मांगलिक हों तो दोष परंपरागत रूप से मिल जाता है - यही सबसे आम हल है।
- मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो तो कई ज्योतिषी दोष कम या रद्द मानते हैं।
- कुछ परंपराओं में 28 वर्ष की आयु के बाद मांगलिक प्रभाव कम माना जाता है।
- गुरु या शुक्र की शुभ दृष्टि को भी परिहार में गिना जाता है।
उपाय
परिहार न हो तो परिवार अपनी आस्था के अनुसार कुंभ विवाह या मंगल शांति पूजा करवाते हैं। यह सरल और परंपरागत है; किसी को डराकर महँगे अनुष्ठान न करवाने दें।
दोनों की जाँच एक साथ
हमारा मुफ़्त कैलकुलेटर दोनों के लिए लग्न और चंद्र से मांगलिक दिखाता है, और पूरी रिपोर्ट परिहार की जाँच करती है।