कुंडली मिलान में नाड़ी सबसे ज़्यादा अंक (8) वाला कूट है। इसलिए "नाड़ी दोष" सुनते ही परिवार घबरा जाते हैं। पर हर नाड़ी दोष एक जैसा नहीं होता।
तीन नाड़ियाँ
हर नक्षत्र एक नाड़ी में आता है:
| नाड़ी | नक्षत्र |
|---|---|
| आदि | अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद |
| मध्य | भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद |
| अंत्य | कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती |
दोनों की नाड़ी अलग हो तो पूरे 8 अंक; एक ही हो तो 0 - इसे नाड़ी दोष कहते हैं। परंपरा में इसे स्वास्थ्य और संतान से जोड़ा जाता है।
परिहार - जब दोष रद्द माना जाता है
- दोनों की राशि एक हो पर नक्षत्र अलग हों।
- दोनों का नक्षत्र एक हो पर राशि अलग हो (नक्षत्र दो राशियों में बँटा हो)।
- दोनों का नक्षत्र एक हो पर चरण अलग हों।
- कई ज्योतिषी राशि स्वामियों की मित्रता या दोनों कुंडलियों में गुरु की स्थिति भी देखते हैं।
इसीलिए "नाड़ी दोष है" के बाद अगला सवाल होना चाहिए: "परिहार है या नहीं?" हमारी पूरी रिपोर्ट यह जाँच दोनों की कुंडली से करती है।
सही नज़रिया
- नाड़ी दोष कुल गुण घटाता है, पर 36 में से बाकी 28 अंक भी देखें।
- परिहार न हो तब भी कई परिवार पंडित जी से नाड़ी दोष शांति पूजा करवाकर आगे बढ़ते हैं - यह आस्था का विषय है।
- किसी को भी डराकर महँगी पूजा या रत्न न बेचने दें।